Nishad Raj Eklavya Story in Hindi


♦ जन्म - महाभारत काल

♦ मृत्यु - यदुवंशी श्रीकृष्ण द्वारा छल से

♦ पिता - महाराज हिरण्यधनु

♦ माता - रानी सुलेखा

♦ बचपन का नाम - अभिद्युम्न ( अभय )

♦ जीवन से शिक्षा -

1. अपने लक्ष्य के प्रति लगन होना

2. समस्याओँ से डट कर सामना करना

3. माता पिता और गुरू का आदर करना

4. मन लगाकर परिश्रम करना

आदि आदि

एकलव्य निषाद वंश के राजा थे l

निषाद वंश या जाति के संबंध मेँ सर्वप्रथम उल्लेख "तैत्तरीय संहिता" मेँ मिलता है जिसमेँ अनार्योँ के अंतर्गत निषाद आता है l

"एतरेय ब्राह्मण" ग्रन्थ उन्हेँ क्रूर कर्मा कहता है और सामाजिक दृष्टि से निषाद को शूद्र मानता है l

महाभारत काल मेँ प्रयाग (इलाहाबाद) के तटवर्ती प्रदेश मेँ सुदूर तक फैला श्रृंगवेरपुर राज्य एकलव्य के पिता निषादराज हिरण्यधनु का था l गंगा के तट पर अवस्थित श्रृंगवेरपुर उसकी सुदृढ़ राजधानी थी l

उस समय श्रृंगवेरपुर राज्य की शक्ति मगध, हस्तिनापुर, मथुरा, चेदि और चन्देरी आदि बड़े राज्योँ के समकक्ष थी l निषाद हिरण्यधनु और उनके सेनापति गिरिबीर की वीरता विख्यात थी l

निषादराज हिरण्यधनु और रानी सुलेखा के स्नेहांचल से जनता सुखी व सम्पन्न थी l राजा राज्य का संचालन आमात्य (मंत्रि) परिषद की सहायता से करता था l

निषादराज हिरण्यधनु को रानी सुलेखा द्वारा एक पुत्र प्राप्त हुआ जिसका नाम "अभिद्युम्न" रखा गया l प्राय: लोग उसे "अभय" नाम से बुलाते थे l

पाँच वर्ष की आयु मेँ एकलव्य की शिक्षा की व्यवस्था कुलीय गुरूकुल मेँ की गई l

बालपन से ही अस्त्र शस्त्र विद्या मेँ बालक की लगन और एकनिष्ठता को देखते हुए गुरू ने बालक का नाम "एकलव्य" संबोधित किया l

एकलव्य के युवा होने पर उसका विवाह हिरण्यधनु ने अपने एक निषाद मित्र की कन्या सुणीता से करा दियाl

एकलव्य धनुर्विद्या की उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहता था l उस समय धनुर्विद्या मेँ गुरू द्रोण की ख्याति थी l पर वे केवल ब्राह्मण तथा क्षत्रिय वर्ग को ही शिक्षा देते थे और शूद्रोँ को शिक्षा देने के कट्टर विरोधी थे l

महाराज हिरण्यधनु ने एकलव्य को काफी समझाया कि द्रोण तुम्हे शिक्षा नहीँ देँगेl

पर एकलव्य ने पिता को मनाया कि उनकी शस्त्र विद्या से प्रभावित होकर आचार्य द्रोण स्वयं उसे अपना शिष्य बना लेँगेl

पर एकलव्य का सोचना सही न था - द्रोण ने दुत्तकार कर उसे आश्रम से भगा दियाl

एकलव्य हार मानने वालोँ मेँ से न था और बिना शस्त्र शिक्षा प्राप्त तिए वह घर वापस लौटना नहीँ चाहता थाl

एकलव्य ने वन मेँ आचार्य द्रोण की एक प्रतिमा बनायी और धनुर्विद्या का अभ्यास करने लगाl शीघ्र ही उसने धनुर्विद्या मेँ निपुणता प्राप्त कर ली l

एक बार द्रोणाचार्य अपने शिष्योँ और एक कुत्ते के साथ उसी वन मेँ आएl उस समय एकलव्य धनुर्विद्या का अभ्यास कर रहे थेl

कुत्ता एकलव्य को देख भौकने लगाl एकलव्य ने कुत्ते के मुख को अपने बाणोँ से बंद कर दियाl कुत्ता द्रोण के पास भागाl द्रोण और शिष्य ऐसी श्रेष्ठ धनुर्विद्या देख आश्चर्य मेँ पड़ गएl

वे उस महान धुनर्धर की खोज मेँ लग गए

अचानक उन्हे एकलव्य दिखाई दिया

जिस धनुर्विद्या को वे केवल क्षत्रिय और ब्राह्मणोँ तक सीमित रखना चाहते थे उसे शूद्रोँ के हाथोँ मेँ जाता देख उन्हेँ चिँता होने लगीl तभी उन्हे अर्जुन को संसार का सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बनाने के वचन की याद आयीl

द्रोण ने एकलव्य से पूछा- तुमने यह धनुर्विद्या किससे सीखी?

एकलव्य- आपसे आचार्य

एकलव्य ने द्रोण की मिट्टी की बनी प्रतिमा की ओर इशारा कियाl

द्रोण ने एकलव्य से गुरू दक्षिणा मेँ एकलव्य के दाएँ हाथ का अगूंठा मांगाl

एकलव्य ने अपना अगूंठा काट कर गुरु द्रोण को अर्पित कर दिया l

कुमार एकलव्य अंगुष्ठ बलिदान के बाद पिता हिरण्यधनु के पास चला आता है l

एकलव्य अपने साधनापूर्ण कौशल से बिना अंगूठे के धनुर्विद्या मेँ पुन: दक्षता प्राप्त कर लेता हैl

आज के युग मेँ आयोजित होने वाली सभी तीरंदाजी प्रतियोगिताओँ मेँ अंगूठे का प्रयोग नहीँ होता है, अत: एकलव्य को आधुनिक तीरंदाजी का जनक कहना उचित होगाl

पिता की मृत्यु के बाद वह श्रृंगबेर राज्य का शासक बनता हैl अमात्य परिषद की मंत्रणा से वह न केवल अपने राज्य का संचालन करता है, बल्कि निषाद भीलोँ की एक सशक्त सेना और नौसेना गठित करता है और अपने राज्य की सीमाओँ का विस्तार करता हैl

इस बीच मथुरा नरेश कंस के वध के बाद, कंस के संबंधी मगध नरेश जरासन्ध शिशुपाल आदि के संयुक्त हमलोँ से भयभीत श्रीकृष्ण मथुरा से अपने भाई बलराम व बंधु बांधवोँ सहित पश्चिम की ओर भाग रहे थेl

तब निषादराज एकलव्य ने श्रीकृष्ण की याचना पर तरस खाकर उन्हेँ सहारा व शरण दियाl

( अधिक जानकारी के लिए पेरियार ललई सिँह यादव द्वारा लिखित एकलव्य नामक पुस्तक पढ़ेँ )

एकलव्य की मदद से यादव सागर तट पर सुरक्षित भूभाग द्वारिका मेँ बस गएl

यदुकुल ने धीरे धीरे अपनी शक्तियोँ का विस्तार किया और यादवोँ ने सुरापायी बलराम के नेतृत्व मेँ निषादराज की सीमाओँ पर कब्जा करना प्रारम्भ कर दियाl

इसी बीच श्रीकृष्ण ने अपनी नारायणी सेना (प्रच्छन्न युद्ध की गुरिल्ला सेना) भी गठित कर ली थीl

अब यादवी सेना और निषादोँ के बीच युद्ध होना निश्चित थाl

यादवी सेना के निरंतर हो रहे हमलोँ को दबाने के लिए एकलव्य ने सेनापति गिरिबीर के नेतृत्व मेँ कई बार सेनाएँ भेजीँl पर यादवी सेनाओँ का दबाव बढ़ता जाता हैl

तब एकलव्य स्वयं सेना सहित यादवी सेना से युद्ध करने के लिए प्रस्थान करते हैँl

बलराम और एकलव्य की सेना मेँ भयंकर युद्ध होता है और बलराम की पराजय होती हैl

बलराम और यादवी सेना को पराजित कर एकलव्य विजय दुंदुभी बजाते हैँ, तभी पीछे से अचानक कृष्ण की नारायणी सेना जो कहीँ बाहर से युद्ध कर लौटी थी, एकलव्य पर टूट पड़ती है l

एकलव्य इस अप्रत्याशित हमले से घिरकर रक्तरंजित हो जाते हैँ l ऐसी ही विकट स्थिति मेँ कृष्ण के हाथोँ महाबली एकलव्य का वध होता है l

अपने महानायक एकलव्य की कृष्ण के हाथोँ मृत्यु से निषाद क्षुब्ध होते हैँ l यदुकुल पतन के बाद उन्हीँ मेँ से एक निषादवीर के द्वारा कृष्ण की हत्या कर दी गई l

इतना ही नहीँ यादवी विनाश के बाद जब श्रीकृष्ण के निर्देशानुसार शेष बचे यदुवंशीय परिवारोँ को लेकर अर्जुन द्वारिका से हस्तिनापुर जा रहे थे

तब बदले की भावना से निषाद-भीलोँ की सेना ने वन पथ मेँ घेरकर भीषण मारकाट मचाई और अर्जुन को पराजित कर पुरूषोँ को बन्दी बना लिया l

साथ ही यदुवंश की सुन्दरियोँ-गोपियोँ का अपहरण कर लिया l

" भीलन लूटी गोपिका,

ओई अर्जुन ओई बाण ll "

46 comments:

  1. Yeh kahani mujhe sab se pahle mere nana ji ne sunayi thi . bachpan se ekalavya mera hero hai

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  2. eklavya is great hero of indian hestry sadhana singh kashayap

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  3. there's a lot of fact related to our community. we the young generation why not get unit to achiever our temporary goal. I am really very thankful and glad to read this truth of nishadraj eklavya.

    thanks
    Satish Kumar Nishad
    (Sr. Software Engg., new delhi)
    email id: satishtoweb@gmail.com
    mobile: 9891427377
    Website: www.nishadshaadi.com

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  4. Right from the ancient period the well offs were always preferred over talented havenots. Such discrimination must stop immediately. Only then we will be able to talk of true Socialism. Otherwise it will be taken for granted that we learnt nothing from History & India will go back to feudal period once again.

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  5. Dear
    Aapne Krishna ke hatyare Nishadveer bataya hai Kya inka name evam kulvansh ke bare me bhee Jankari hai yadi hai to batane ka kasht kare.
    Thanks
    Rajendra

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  6. Dear
    aisa kuch nahi ke humre samaj kise se peeche hai pr ager kuch sampaan loog maded ke liya aage aate be hai to unka sahi sammaan nahi kiya jaata or unhe koi na koi tana maar kar samaaj ke samne uphass ka paataar baniya jaat ahai ... in sb baato ko hume he rookana hoga .....Yogesh turaha

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    1. aapne sahi kaha he yogesh g. jb tak khud kuch na kare tb tak kuch nahi hone wala he..

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  7. ye blogpost ko dekhkar achha laga
    admn. ise update karte rahen ........
    Amit Mandal

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  10. Vah Nishad Veer Akhir Kaun Tha Jisne Krishna ko markar Chhal ka badla liya ?

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    1. uska name Jara(जारा)tha
      my whatsapp no. is7379215561
      my name Kundan kumar bind
      from kadipur sultanpur
      any confusion regarding Nishad history you can talk with me

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  11. Thank you admin, aapne jo yah nishad raj eklavya ki kahani post ki hai padhkar bahut achha laga. Veer Eklavya arjun se bade dhanurdhar the. "JAY NISHAD RAJ". Admin aap is blog ko update karte rahe aapka blog padhne me bahut achha lagta hai.

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  12. Nishad raj मै देख रहा हु कि जब कभी भी निषादो की सभाये, सम्मेलन, रैलीया होती है तो पढे लिखे, अच्छे पदो पर कर्यरत, अमीर तबके के निषाद भाइयो का सहयोग नही मिल पाता है। आखिर क्यो आप सभी बुद्धजीवि लोग पिछे हट जाते है क्यो सहयोग से कतराते है? क्यो सभाओ रैलियो मे भाग नही लेते।

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    1. Padhe likhe logo ki sahbhagita kam hai, kintu naganya nahi hai. Hame unse sampark karna hoga aur apna mission batakar sahamat karna hoga.,

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  13. A group for our community on whatsapp to get more knowledge and interesting facts about nishadvansh join it now 9045549783 admin no.

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    1. Please forward messages me on 9424321754

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    2. This no. is not connected with whatsapp

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  14. thank you admin. JAY NISHAD RAJ. JAY VEER EKLAVYA.

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  15. Shringberpur is most religious place for Nishad people. Nishad Raj Fort( Kila) is in existance today also, which is protected by Geological Survey of India.I, have visted three times here, recently on 31.07.2015. We the social people have decided to construct a temple of Nishad Raj here. Pillars & Foundation work is in progress . I appeal social people to donate fund for this good cause . People may please contact Mob No. 09424321754.
    R. R. Nawik

    State president
    National Association of Fishermen( Rashtriya Nishad Sangh) M.P. Branch , Jabalpur

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  16. my facebook ID manjhi nishad kewat verma , IS kahani se hame pure des wasiyon ko jan

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  17. We have to support Dr Sanjay Kumar Nishad
    http://nishadekta.blogspot.in/2011/01/nishad-raj-eklavya.html

    Arun Nishad
    Whatsap: 7607564052

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  18. jay nishad raj--nishadshailendra2604@gmail.com

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  19. kal ke nishad raj eklavya or aaj me bahut antar h.vo akela ye sb kr gye tum sb log ye nhi kr sakte.bcs you are mindless people. are krna h to khud kyo nhi krte khud eklavya kyo nhi bante but nhi badi babdi rajniti krke kuchh nhi pa paoge sivay baba ji ka thullu

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  20. eklavya sammpurna manav samaj k aadarsh h tum logo jaise chhote vichar vale nahi.bhagvan ko cast se jodkar khud ka apman kr rhe ho tuchh vichar h tumhare nishad ekta

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  21. Jai nishad raj
    I request to group admin for joining in this group
    my name is Kundan kumar bind
    mob no. 7379215561

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  22. My ideal is Eklavya.We Ekalavyavanshi can learn a lot from Eklavya the great archer, warrior who stand against social injustice.But I will/have never offered my thumb to Dronocharya.I appeal to all my brothers and sisters of nishad community to develop a fighting spirit of Ekalavya and get recognized in the society.

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  23. Eklavya Jaisa bane socha ko positive rakkho acchi shiksha ke liye struggle Kare aur dusara ke madad kare .Desh ke pragati me bhagidar bane . Brajendra MRI Engineer MRIconcept.com

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  24. jai nishad raj bhaiyo
    My whatsaap no. 7380841877
    9685330763

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  25. We have to suppot Dr.Sanjay kumar nishad,
    Jai nishad raj,
    jai eklavya,
    jai nishad ekta parishad ....


    Huunka utha nishad samaj hum ek hai.
    Thank u,

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  26. देवब्रत

    ग्राम कटघर पूरे चौहान कादीपुर सुल्तांपुर
    मो0 7839101010


    सभी निषाद भाइयो से मेरा निवेदन है कि सभी निषाद भाइयो एक जुट होकर अपने मिशन को सफल बनाये और और आज जिन निषाद भाई के पास बडप्पन है उनसे मेरा अनुरोध है कि वे मीटिंग मे भाग लेकर निषाद एकता को सफल बनाये

    जय निषाद राज

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