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निषाद सभाओँ का कड़वा सच



दोस्तोँ क्या आप जानते हैँ
निषाद सभा मेँ बुद्विजीवियोँ को
बोलने के लिए कितना समय
मिलता है ?


मै 25 से ज्यादा बार
निषाद सभाओँ मेँ गया हूँ

इस आधार पर मैँ
कहता हूँ

निषाद सभा मेँ बुद्विजीवियोँ को
बोलने के लिए समय
मिलता है


केवल 2 मिनट


बुद्विजीवी माने क्या ??
बुद्विजीवी से मेरा मतलब
है निषाद समाज के वे लोग
जो सरकार द्वारा आयोजित
कम से कम 5 अलग अलग
प्रतियोगी परीक्षा मेँ बैठ चुके होँ
और किसी एक परीक्षा मेँ
उन्हेँ सफलता मिली हो



निषाद समाज के इन बुद्विजीवियोँ
के पास निषादोँ को देने
के लिए कुछ बुद्वि और
सुझाव है


ये वे लोग हैँ जो
चक्रव्यूह के सातोँ द्वारोँ
को तोड़ना जानते हैँ



आखिर क्या चाहते हैँ बुद्विजीवी ???
15000 वेतन पाने वाले
और 10 से 5 आफिस मेँ
डयूटी करने वाले
बुद्विजीवी मात्र इतना चाहते हैँ
कि जब भी कहीँ निषाद सभा
या सम्मेलन हो
तो मँच पर बुला कर
1 घंटा उन्हेँ भी बोलने
दिया जाय


पर दोस्तोँ असलियत क्या है ????

आप खुद किसी निषाद
सभा मेँ जाकर देख
सकते हैँ
इन्हेँ मंच तक पहुँचने
ही नहीँ दिया जाता

और अगर कुछ बुद्विजीवियोँ
को मौका भी मिलता है
तो 2 मिनट का


2 मिनट मेँ 120 सेकेण्ड
होते हैँ

10 सेकेण्ड मंच तक पहुचने
मेँ लगते हैँ

10 सेकेण्ड मंच से वापस
उतरने मेँ लगते हैँ

शेष बचा समय = 100 सेकेण्ड


15000 वेतन पाने वाले
और 10 से 5 आफिस मेँ
डयूटी करने वाले
बुद्विजीवी
को केवल 100 सेकेण्ड
मेँ बतानी होती है
कि आखिर निषाद समाज
क्यूँ पिछड़ा है
कैसे और कब से हो रहा है
उनके साथ अन्याय
और सबसे जरूरी बात
क्या है उपाय ???


पर घबराइए मत दोस्तोँ
अब हम मुन्नाभाई जैसे
चुटकुलोँ पर काम कर
रहे है
जिन्हेँ सुनाने मेँ
100 सेकेण्ड से कम
का वक्त लगता है


2 मिनट बाद निषाद
जाति के कार्यकर्ता
चिल्लाने लगते है :
"अबे साले मंच से
उतरेगा की नहीँ,
टाइम खत्म, नेता लोग
का अब नाच गाना सुनने
का मन है
अब नाच गाना होगा "

मंच सजने लगता है
बुद्वजीवी कहता है
"भाई जब तक मंच
सज रहा है मुझे कुछ
बोलने दो "

निषाद
जाति के कार्यकर्ता :
"माधरचोद तेरे को नेताजी
ने भाषण सुनने को बुलाया है
या भाषण देने के लिए"


15000 वेतन पाने वाले
और 10 से 5 आफिस मेँ
डयूटी करने वाला
बुद्विजीवी
मंच से उतर जाता है


फिर मंच पर आते हैँ
कव्वाल
पहले दारू की बोतल
खोल कर दारू पीयेगेँ
फिर गाना चालू होगा

"का होई निरहू
पढाई ये बचवा
लेता 2 ठे बकरी
जिआई ए बचवा"


नेता को पूरी छूट
चाहे 5 घंटे के सम्मेलन
मेँ 3 घंटा भाषण देता रहे

भाषण चालू होता है
एक ठे रहेन राम जी
जब जंगले मेँ गएन
तो मिले निषादराज
बोलो जय निषादराज
एक ठे रहेन एकल्वय
बोलो जय एकल्वय

मायावती ने हमको
केवल पाँच टिकट दिया
सारे समाज का वोट
मायावती को जाना
चाहिए

मुलायम के समर्थक नेता
जब मंच पर आते हैँ
तो

मुलायम ने हमको
केवल छ: टिकट दिया एक ज्यादा दिया
सारे समाज का वोट
मुलायम को जाना
चाहिए


15000 वेतन पाने वाले
और 10 से 5 आफिस मेँ
डयूटी करने वाले
बुद्विजीवी
किसी कोने मेँ बैठा
रो रहा है
आखिर रविवार
की छुट्टी थी
घर पर रह कर आराम करता


अगली सभा मेँ उसे देखते
ही निषाद जाति के नेता
इस आदमी को पहले
घसीट कर सभा से बाहर करो


आखिर मंच पर
बुद्विजीवियोँ को
क्यूँ नहीँ बोलने देते
निषाद जाति के नेता :
कारण है डर
निषाद जाति के नेता
सोचते हैँ अगर बुद्वीजीवियोँ को
मंच से बोलने देगेँ तो
15000 वेतन पाने वाले
और 10 से 5 आफिस मेँ
डयूटी करने वाले
बुद्विजीवी
अपनी अपनी नौकरियाँ
छोड़ कर चुनाव
लड़ना चालू कर देगेँ
और फिर तब उनको
समाज मेँ कोई नहीँ पूछेगा
उनका राजनीतिक कैरियर
तबाह बरबाद हो जाएगा

दोस्तोँ इस लेख को
निषाद समाज के हर
नेता को पढकर सुनाओ
ताकि जब 5 घंटे
की सभा मेँ
3 घंटा उन्हेँ बोलने
को मिले

उन्हेँ कोई पद नहीँ चाहिए
बस इतनी सी विनती
बुद्विजीवियोँ के समय
का दायरा 100 सेकेण्ड से
कुछ बढ़ा दिया जाए

written by Amit Nishad

जनलोकपाल और निषाद

कभी सोचा है कि अगर
अन्ना का जनलोकपाल कानून 
बन जाए तो निषाद 
समाज को क्या फायदा 
होगा ?


मैँ कहता हूँ कुछ नहीँ


जी हाँ कुछ नहीँ


भष्ट्राचार मिट जाएगा तो 
जाति प्रमाण पत्र
राशन कार्ड
पासपोर्ट
सब आसानी से बन जाएगा


पर जब 1000 IAS अधिकारियोँ की भर्ती होगी तो आबादी के हिसाब से न्यूनतम 200 अधिकारी निषाद समाज से नहीँ जा पाएगेँ

अन्ना के जनलोकपाल कानून 
बनने के बाद भी
निषाद समाज के 
महज 2 या 3 ही लोग
ही IAS बन पाएगे 


जब डिग्री कालेजोँ मेँ 1000
शिक्षकोँ की भर्ती होगी तो आबादी के हिसाब से न्यूनतम 200 शिक्षक निषाद समाज से नहीँ जा पाएगेँ

अन्ना के जनलोकपाल कानून 
बनने के बाद भी
निषाद समाज के 
महज 1 या 2 ही लोग
ही डिग्री कालेज मेँ
शिक्षक बन पाएगे


पता कीजिए आपके 
कालेज मेँ कुल कितने 
शिक्षक है
क्या 24.3 प्रतिशत शिक्षक
निषाद समाज के हैँ ?


इसके लिए हमेँ भगत सिँह राजगुरू चंद्रशेखर आजाद आदि का समाजवाद लाना होगा


via Amit Nishad

14.5 प्रतिशत नौकरियाँ निषादोँ को मिलनी चाहिए

उत्तर प्रदेश मेँ निषाद 
समाज की वास्तविक 
आबादी पैँतालिस प्रतिशत (45 PERCENT) है


उत्तरप्रदेश का कोई
ऐसा गाँव शहर मोहल्ला नहीँ जहाँ
निषाद समाज के लोग नहीँ रहते


जब आरक्षण देने के 
लिए जाति आधारित
जनगणना की गई तो
निषाद समाज की आबादी का 
कुल प्रतिशत लगभग 40 आया 


उच्च जातियोँ को लगा
कि अगर समाजवाद
के नियमोँ के मुताबिक
अगर इन्हेँ आरक्षण देना पड़ा
तो 40 प्रतिशत का आरक्षण देना पड़ेगा


इसे रोकने के लिए उच्च जातियोँ 
के पास केवल रास्ता था
ठाकुर ब्राह्मण पंडित
आदि 
उच्च जातियोँ की आबादी
सरकारी आकड़ोँ मेँ
बढ़ा कर
बताया जाय और
निषाद व अन्य जातियोँ
की आबादी जितना 
ज्यादा घटा सकेँ 
उतना ज्यादा घटा
दिया जाए


सारी तिकड़म करने के बाद भी
सरकार सरकारी आकड़ोँ 
मेँ हमारी जाति की 
आबादी 40 प्रतिशत
से
घटकर
22 प्रतिशत हो गई


पर ये निषाद समाज को
22 प्रतिशत भी नहीँ
देना चाहते थे

उन्होने निषाद समाज
की 
7.5 प्रतिशत उपजातियोँ
को घुमन्तु घोषित कर
दिया


जी हाँ

घुमन्तु

यानी एक जगह से
दूसरी जगह घूमने
वाले


और जो एक जगह से
दूसरी जगह घूमने
वाले हैँ जिनका कोई 
निश्चित ठिकाना
नहीँ था
उनका जाति प्रमाण
पत्र नहीँ बनाया जा
सकता


उन्हेँ किसी भी प्रकार का
आरक्षण आज तक
प्राप्त नहीँ है 


निषाद समाज को अलग
से 14.5 प्रतिशत ना देकर
अन्य पिछड़ा वर्ग मेँ
रख दिया गया

और जो 14.5 प्रतिशत
नौकरियाँ
निषादोँ को मिलनी
चाहिए थी
उसमेँ से केवल 0.5
प्रतिशत ही मिल पाता है

बाकी कि 14 नौकरियोँ
पर यादव जाति के
युवकोँ का कब्जा 
हो जाता है


घुमन्तु आरक्षण
मागने तो जाए मार
कर भगा दिया जाएगा
"सालोँ घुमन्तु की जाति
घुमोँ फिरो ऐश करो

नौकरियोँ आदि मेँ हिस्सा
मागोगे तो जमीन मेँ 
दफन कर दिए जाओगे "

अगर आप ब्लाग
लिखते है तो अपने 
ब्लाग पर इसे पोस्ट करेँ

अगर आप नेता हैँ
तो अपने गाँव के
लोगोँ को बताए
via Amit Nishad

समाजवाद क्या है ?

समाजवाद क्या है ?

समाज मेँ सभी जातियोँ और वर्गोँ का सरकारी तंत्र मेँ उनकी आबादी के अनुसार उचित प्रतिनिधित्व

ये परिभाषा समाजवाद के पिता कार्ल माकर्स की है l ऐसी ही परिभाषा हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी के क्रांतिकारी भगत सिँह ने भी दी है

उत्तर प्रदेश मेँ निषाद समाज की सभी उपजातियोँ की आबादी इतनी है कि 404 विधान सभा की सीट मेँ से न्यूनतम 80 निषाद समाज की सभी उपजातियोँ से चुनी जानी चाहिए

खुद को समाजवाद के मुताबिक बताने वाली समाजवादी पार्टी ने क्या निषाद समाज के 80 उम्मीदवारोँ को टिकट दिए हैँ 

अगर नहीँ तो हटा दो ये समाजवादी शब्द पार्टी के नाम से

सपा का नया नाम = जातिवादी पार्टी

बसपा का नया नाम = बपा बहुजन पार्टी

आइए आने वाली 26 जनवरी को संकल्प ले की समाजवाद के नाम पर अन्याय पूर्ण व्यवस्था को नहीँ सहेगेँ
जिस समाजवाद के लिए भगत सिँह आजाद जैसे लोगोँ ने जान दी वो आकर रहेगा



दोस्तोँ जिस दिन गाँव 
गाँव मेँ निषाद समाज
ने एक एक जिन्दा 
बच्चे औरत आदमी 
को जाति को गिन कर
गुपचुप तरीके से
"जाति रजिस्टर" बना लेगी
और फिर सारे आकड़ोँ को जोड़ेगी

उसे पता चलेगा कि
उत्तरप्रदेश मेँ 60 प्रतिशत 
निषाद समाज के लोग हैँ


निषाद समूह के कुछ बुद्विजीवी 
लोगोँ का अनुमान कहता है
उत्तरप्रदेश मेँ 
चाहे जैसे जोड़ो 
न्यूनतम 45 प्रतिशत 
निषाद समाज है

जरा सोचो तब क्या
होगा जब निषाद समाज को
पता चलेगा कि
उत्तरप्रदेश मेँ 60 प्रतिशत 
निषाद समाज के लोग हैँ


अगर विधानसभा की 
60 प्रतिशत सीटेँ
निषाद समाज को दे 
दी जाए

केवल आधी सीटेँ चाहिए सरकार बनाने के लिए


आने वाले 1000 सालो
तक निषाद उत्तरप्रदेश पर राज्य करेँगेँ


आने वाले 1000 सालो
तक उत्तरप्रदेश का हर
मुख्यमंत्री निषाद होगा
हर मंत्री निषाद होगा

हर मंत्रालय के प्रमुख 
की कुर्सी पर निषाद 
बैठा होगा


पर कैसे होगा ये सब
आजादी मिले 65 साल 
हो गए और हमारी जाति
के नेता एक जाति 
रजिस्टर नहीँ बना पाए


अपने गाँव के नेता एक 15 रूपए
की रजिस्टर नोटबुक



क्या आप अपने नेता 
को एक 15 रूपए की 
कापी खरीद कर नहीँ दे सकते ?


निषाद समाज के नेता 
से कहो
लिस्ट बनाए उन सब की जो आगामी मतदान मेँ वोट
देने वाले हैँ

देखना तुम्हारे गाँव मेँ 
हर कोई वोट देने जाएगा

ठाकुर पंडित यादव 
बम्बई दिल्ली गए 
अपने रिश्तेदारोँ को 
भी आने जाने का टिकट और पाँच सौ 
रूपए भेज कर बुला 
लेते हैँ

मतदाता सूची लेकर बैठो
एक एक चेहरे के बारे
मेँ पता लगाओ
वो गाँव मेँ किसके घर 
का है और कहाँ रहता है

अपने दादा जी से पूछो
क्या ये ठाकुर
आपके गाँव मेँ पैदा हुआ था

ध्यान से देखो

सनसनीखेज खुलासे होगेँ

अपने आप को उत्तरप्रदेश मेँ
50 प्रतिशत
बताने के लिए 
इन्होने अपने परिवार
के सदस्योँ की संख्या 
बढा कर लिखाई है

हमारे गाँव मेँ अजय सिँह
के दो बेटे हैँ
मतदाता सूची मेँ इनके
18 बेटे और बेटियोँ के
नाम दर्ज हैँ

दोस्तोँ क्या 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण नहीँ मिलना चाहिए


नहीँ बिल्कुल गलत बात


हर जाति को उसकी आबादी के हिस्सा से
हिस्सा मिलना चाहिए


अगर किसी राज्य मेँ ठाकुर ब्राह्मण की आबादी केवल 2 प्रतिशत है तो उस राज्य मेँ ठाकुर ब्राह्मणोँ को 2 प्रतिशत से ज्यादा सीटेँ नहीँ लेनी चाहिए

आबादी केवल 2 प्रतिशत
फिर भी ठाकुर ब्राह्मण चाहते है कि 50 प्रतिशत सीटेँ सामान्य वर्ग अर्थात ठाकुर लाला ब्राह्मण से भरी जाएँ


क्या ये शहीद भगत सिँह राजगुरू आजाद के समाजवाद के सपने को चकनाचुर करना नहीँ है

क्या ये देश के साथ द्रोह नहीँ कर रही

निषाद शक्ति

संख्या में ढेर फिर भी हुए ढेर!
दूर -दूर तक इस समाज में
वीरों की कमी दिख
रही है.......
मछुआ समुदाय के सभी बंधुओं
को ज्ञात होना चाहिए
की भारत वर्ष
की जनसँख्या एक अरब इक्कीस
करोर हो गयी है और सुर्वे
रिपोर्ट के अनुसार
लोगों का मानना है की मछुआ
समाज के
लोगों का अनुमानतः २२
प्रतिशत की हिस्सेदारी है.
इस तरह अगर हम अनुमान
लगाएं तो हमारे समाज
की आबादी २५ करोरे
को पार कर रही है. बड़े-बड़े
नेता, अर्थशास्त्री,
बुद्धिजीवी लोग भारत देश के
विकास की बात करते हैं.
क्या यह संभव हो सकता है
की जिस देश का एक वर्ग
इंतनी संक्या में होते हुए
बी उपेक्षा का शिकार हो,
उसके विकास की बात न करके
देश का विकास
किया जा सकता है? इस समाज
के जो जागरूक भाई लोग हैं
उन्हें अपने भाई-
बहनों की स्थिति का अच्छा अ
है की कितनी जिल्लत
की जिंदगी जी रहे हैं. अगर
इस समय इस समाज में कोई
शोषित समाज है तो वो है
मछुआ समुदाय है. अभी तक इस
समाज में एक वीरांगना बहन
फूलन देवी को छोड
दिया जाय तो दूर-दूर तक
कोई वीर नजर
नहीं आता जो इन २५ करोर
लोगों के हित की बात करे.
ऐसा नहीं है की इस समाज में
नेता नहीं हैं लेकिन
समस्या इस बात की है
की हमारे ये नेता विकास
की परिभाषा ही नहीं जानते.
ये तो बस हमरे कमजोर भाई
लोगों का समूह इकट्ठा करके
दूसरी पार्टी के नेताओं
द्वारा बिक जाते हैं.
जो नेता बा. सा .पा./
सा पा / भा जा पा/कांग्रेस/
आदि पार्टियों नेताओं के
हाथों अपने आप को बेचता है.
वो इस समाज के विकास
की बात किससे कहने जायेगा.
बहतु से नेताओं का कहना है
की हमरे लोग जागरूक नहीं हैं.
यह एक गंभीर समस्या है
लेकिन इसके लिए हमारे समाज
के बुद्धिजीवी लोग
ही जिम्मेदार हैं. अगर आज के
समय में देखा जाये तो इस
समाज के लोग काफी संख्या में
विकास किये और लगभग
सभी विभाग में अछे पदों पैर
तैनात हैं लेकिन अगर उनसे
मछुआ समुदाय के विकास
की बात कही जाये तो वे देश
के विकास की बात करते हैं
जबकि ये भूल जातें हैं की अगर
उनका अपना विकास
नहीं होगा तो वे देश
का क्या विकास करेंगे? कुछ
लोग बड़े पद पैर पहुँच जाने के
बाद अपने बिरादरी के
लोगों से मिलनमे में कतराते हैं
जबकि कोई नाते-रिश्ते
की बात लेकर
वो किसी ठाकुर/ब्रह्मण /
यादव/कुर्मी परिवार में
नहीं जायेंगे. आज के हमारे
समाज के युवा वर्ग शिक्षित
तो हो गए हैं पर
अच्छी शिक्षा हासिल करने के
बाद भी जागरूक
नहीं हो पायें हैं. बहुत से
शिक्षित लोग गरीबों के
मशीहा बनते हैं पर वो सिर्फ
बातों में कबी अपने जीवन
उतरने की कोसिस
भी नहीं करते. इस लोकतंत्र में
अगर इस जाती का विकास
नहीं होगा तो ये समाज
सिर्फ आरक्षण की भीख
मांगता रहेगा और मिलेगा कुछ
भी नहीं.
किसी समय इस वंशज के लोग
शासक/राजा हुआ करते थे पर
आज तो जो संख्याबल में
ज्यादा है उसे शासन
करना चाहिए तबी इनका और
देश का विकास हो सकतअ है.
इस समाज में अनेक विद्वान
पैदा हुए हैं लेकिन आज सब सुख-
सुविधाएँ होते हुए
भी इतनी संख्या में से कितने
लोग आई. ए. यस./ आई. पी.
यस./पी. सी. यस.
अधिकारी बने हैं? महज चंद
लोग होंगे उँगलियों पर गिने
जा सकते हैं. आज के हमरे
युवावों को किस
सुविधा की कमी है/
या उनकी सोच में ही कमी है?
हम अपने आगे aaने
वाली पीढ़ी के लिए कोई
प्लात्फोर्म बना रहे हैं
जो उनके परिश्रम
को सफलता दिला सके?
हमारे समुदाय के जनमानस के
साथ कुछ विशेष समस्याएं हैं
जो विकास की बाधक साबित
हो रही हैं.
१- अशिक्षा
२- बाल-विवाह
३- अन्धविश्वास एवं
आदम्ब्रोम में लिप्त होना
४- नशा के कारन अछि सोच
की कमी
५-शहरों से दूर नदी-तालाबों
के किनारे बसेरा
६- अपने भाई- बंधू
द्वारा शोषित किया जाना
७- आपसी वाद-संवाद की कमी
८- अपने बंधू पर विस्वास न
करना. Writen by raj bahadur nishad

निषाद-कश्यप

निषाद
जाति भारतवर्ष
की मूल एवं
प्राचीनतम
जातियों में से एक
हैं। रामायणकाल में
निषादों की अपनी अलग
सत्ता एवं
संस्कृति थी , एवं
निषाद एक
जाति नहीं बल्कि चारों वर्ण
से अलग "पंचम वर्ण"
के नाम से
जाना जाता था।
आदिकवि महर्षि बाल्मीकि,
विश्वगुरू
महर्षि वेद व्यास,
भक्त प्रह्लाद और
रामसखा महाराज
श्रीगुहराज निषाद
जैसे महान आत्माओं
ने इस जाति सुशोभित
किया है।
स्वतंत्रता आन्दोलन
में भी इस समुदाय के
शूरवीरों ने बढ़ -
चढ़ कर हिस्सा लिया,
लेकिन आज इस समुदाय
के लोंगो में
वैचारिक भिन्नता के
कारण समुदाय
का विकास अवरुद्ध
सा हो गया है। उप -
जाति, कुरी, गौत्र के
आधार पर समुदाय
का विखंडन हो रहा है,
फलतः समुदाय के
सामाजिक , धार्मिक
आर्थिक एवं
राजनैतिक मान-
मर्यादा में ह्रास
हो रहा है।
इसी वैचारिक
भिन्नता का उन्मूलन
एवं उप -जाति, कुरी,
गौत्र के आधार
सामाजिक विखराव
को रोकने हेतु एक
प्रयास
किया जा रहा है। इस
ब्लोग के माध्यम से
हम अपने समुदाय के
सभी सदस्यों को भाषा,
क्षेत्र, उप-जाति,
कुरी, गौत्र जैसे
भेदभाव मिटाकर
आपसी एकता को मजबूत
करने का अनुरोध करते
हैं।
निषाद समुदाय
भाषा एवं क्षेत्र के
अनुसार विभिन्न
नामों से जाने जाते
है , जैसे कश्यप,
मल्लाह, बाथम,
रायकवार इत्यादि।
via-nishadkashyap.blogspot.com