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निषाद सभाओँ का कड़वा सच



दोस्तोँ क्या आप जानते हैँ
निषाद सभा मेँ बुद्विजीवियोँ को
बोलने के लिए कितना समय
मिलता है ?


मै 25 से ज्यादा बार
निषाद सभाओँ मेँ गया हूँ

इस आधार पर मैँ
कहता हूँ

निषाद सभा मेँ बुद्विजीवियोँ को
बोलने के लिए समय
मिलता है


केवल 2 मिनट


बुद्विजीवी माने क्या ??
बुद्विजीवी से मेरा मतलब
है निषाद समाज के वे लोग
जो सरकार द्वारा आयोजित
कम से कम 5 अलग अलग
प्रतियोगी परीक्षा मेँ बैठ चुके होँ
और किसी एक परीक्षा मेँ
उन्हेँ सफलता मिली हो



निषाद समाज के इन बुद्विजीवियोँ
के पास निषादोँ को देने
के लिए कुछ बुद्वि और
सुझाव है


ये वे लोग हैँ जो
चक्रव्यूह के सातोँ द्वारोँ
को तोड़ना जानते हैँ



आखिर क्या चाहते हैँ बुद्विजीवी ???
15000 वेतन पाने वाले
और 10 से 5 आफिस मेँ
डयूटी करने वाले
बुद्विजीवी मात्र इतना चाहते हैँ
कि जब भी कहीँ निषाद सभा
या सम्मेलन हो
तो मँच पर बुला कर
1 घंटा उन्हेँ भी बोलने
दिया जाय


पर दोस्तोँ असलियत क्या है ????

आप खुद किसी निषाद
सभा मेँ जाकर देख
सकते हैँ
इन्हेँ मंच तक पहुँचने
ही नहीँ दिया जाता

और अगर कुछ बुद्विजीवियोँ
को मौका भी मिलता है
तो 2 मिनट का


2 मिनट मेँ 120 सेकेण्ड
होते हैँ

10 सेकेण्ड मंच तक पहुचने
मेँ लगते हैँ

10 सेकेण्ड मंच से वापस
उतरने मेँ लगते हैँ

शेष बचा समय = 100 सेकेण्ड


15000 वेतन पाने वाले
और 10 से 5 आफिस मेँ
डयूटी करने वाले
बुद्विजीवी
को केवल 100 सेकेण्ड
मेँ बतानी होती है
कि आखिर निषाद समाज
क्यूँ पिछड़ा है
कैसे और कब से हो रहा है
उनके साथ अन्याय
और सबसे जरूरी बात
क्या है उपाय ???


पर घबराइए मत दोस्तोँ
अब हम मुन्नाभाई जैसे
चुटकुलोँ पर काम कर
रहे है
जिन्हेँ सुनाने मेँ
100 सेकेण्ड से कम
का वक्त लगता है


2 मिनट बाद निषाद
जाति के कार्यकर्ता
चिल्लाने लगते है :
"अबे साले मंच से
उतरेगा की नहीँ,
टाइम खत्म, नेता लोग
का अब नाच गाना सुनने
का मन है
अब नाच गाना होगा "

मंच सजने लगता है
बुद्वजीवी कहता है
"भाई जब तक मंच
सज रहा है मुझे कुछ
बोलने दो "

निषाद
जाति के कार्यकर्ता :
"माधरचोद तेरे को नेताजी
ने भाषण सुनने को बुलाया है
या भाषण देने के लिए"


15000 वेतन पाने वाले
और 10 से 5 आफिस मेँ
डयूटी करने वाला
बुद्विजीवी
मंच से उतर जाता है


फिर मंच पर आते हैँ
कव्वाल
पहले दारू की बोतल
खोल कर दारू पीयेगेँ
फिर गाना चालू होगा

"का होई निरहू
पढाई ये बचवा
लेता 2 ठे बकरी
जिआई ए बचवा"


नेता को पूरी छूट
चाहे 5 घंटे के सम्मेलन
मेँ 3 घंटा भाषण देता रहे

भाषण चालू होता है
एक ठे रहेन राम जी
जब जंगले मेँ गएन
तो मिले निषादराज
बोलो जय निषादराज
एक ठे रहेन एकल्वय
बोलो जय एकल्वय

मायावती ने हमको
केवल पाँच टिकट दिया
सारे समाज का वोट
मायावती को जाना
चाहिए

मुलायम के समर्थक नेता
जब मंच पर आते हैँ
तो

मुलायम ने हमको
केवल छ: टिकट दिया एक ज्यादा दिया
सारे समाज का वोट
मुलायम को जाना
चाहिए


15000 वेतन पाने वाले
और 10 से 5 आफिस मेँ
डयूटी करने वाले
बुद्विजीवी
किसी कोने मेँ बैठा
रो रहा है
आखिर रविवार
की छुट्टी थी
घर पर रह कर आराम करता


अगली सभा मेँ उसे देखते
ही निषाद जाति के नेता
इस आदमी को पहले
घसीट कर सभा से बाहर करो


आखिर मंच पर
बुद्विजीवियोँ को
क्यूँ नहीँ बोलने देते
निषाद जाति के नेता :
कारण है डर
निषाद जाति के नेता
सोचते हैँ अगर बुद्वीजीवियोँ को
मंच से बोलने देगेँ तो
15000 वेतन पाने वाले
और 10 से 5 आफिस मेँ
डयूटी करने वाले
बुद्विजीवी
अपनी अपनी नौकरियाँ
छोड़ कर चुनाव
लड़ना चालू कर देगेँ
और फिर तब उनको
समाज मेँ कोई नहीँ पूछेगा
उनका राजनीतिक कैरियर
तबाह बरबाद हो जाएगा

दोस्तोँ इस लेख को
निषाद समाज के हर
नेता को पढकर सुनाओ
ताकि जब 5 घंटे
की सभा मेँ
3 घंटा उन्हेँ बोलने
को मिले

उन्हेँ कोई पद नहीँ चाहिए
बस इतनी सी विनती
बुद्विजीवियोँ के समय
का दायरा 100 सेकेण्ड से
कुछ बढ़ा दिया जाए

written by Amit Nishad

जनलोकपाल और निषाद

कभी सोचा है कि अगर
अन्ना का जनलोकपाल कानून 
बन जाए तो निषाद 
समाज को क्या फायदा 
होगा ?


मैँ कहता हूँ कुछ नहीँ


जी हाँ कुछ नहीँ


भष्ट्राचार मिट जाएगा तो 
जाति प्रमाण पत्र
राशन कार्ड
पासपोर्ट
सब आसानी से बन जाएगा


पर जब 1000 IAS अधिकारियोँ की भर्ती होगी तो आबादी के हिसाब से न्यूनतम 200 अधिकारी निषाद समाज से नहीँ जा पाएगेँ

अन्ना के जनलोकपाल कानून 
बनने के बाद भी
निषाद समाज के 
महज 2 या 3 ही लोग
ही IAS बन पाएगे 


जब डिग्री कालेजोँ मेँ 1000
शिक्षकोँ की भर्ती होगी तो आबादी के हिसाब से न्यूनतम 200 शिक्षक निषाद समाज से नहीँ जा पाएगेँ

अन्ना के जनलोकपाल कानून 
बनने के बाद भी
निषाद समाज के 
महज 1 या 2 ही लोग
ही डिग्री कालेज मेँ
शिक्षक बन पाएगे


पता कीजिए आपके 
कालेज मेँ कुल कितने 
शिक्षक है
क्या 24.3 प्रतिशत शिक्षक
निषाद समाज के हैँ ?


इसके लिए हमेँ भगत सिँह राजगुरू चंद्रशेखर आजाद आदि का समाजवाद लाना होगा


via Amit Nishad

14.5 प्रतिशत नौकरियाँ निषादोँ को मिलनी चाहिए

उत्तर प्रदेश मेँ निषाद 
समाज की वास्तविक 
आबादी पैँतालिस प्रतिशत (45 PERCENT) है


उत्तरप्रदेश का कोई
ऐसा गाँव शहर मोहल्ला नहीँ जहाँ
निषाद समाज के लोग नहीँ रहते


जब आरक्षण देने के 
लिए जाति आधारित
जनगणना की गई तो
निषाद समाज की आबादी का 
कुल प्रतिशत लगभग 40 आया 


उच्च जातियोँ को लगा
कि अगर समाजवाद
के नियमोँ के मुताबिक
अगर इन्हेँ आरक्षण देना पड़ा
तो 40 प्रतिशत का आरक्षण देना पड़ेगा


इसे रोकने के लिए उच्च जातियोँ 
के पास केवल रास्ता था
ठाकुर ब्राह्मण पंडित
आदि 
उच्च जातियोँ की आबादी
सरकारी आकड़ोँ मेँ
बढ़ा कर
बताया जाय और
निषाद व अन्य जातियोँ
की आबादी जितना 
ज्यादा घटा सकेँ 
उतना ज्यादा घटा
दिया जाए


सारी तिकड़म करने के बाद भी
सरकार सरकारी आकड़ोँ 
मेँ हमारी जाति की 
आबादी 40 प्रतिशत
से
घटकर
22 प्रतिशत हो गई


पर ये निषाद समाज को
22 प्रतिशत भी नहीँ
देना चाहते थे

उन्होने निषाद समाज
की 
7.5 प्रतिशत उपजातियोँ
को घुमन्तु घोषित कर
दिया


जी हाँ

घुमन्तु

यानी एक जगह से
दूसरी जगह घूमने
वाले


और जो एक जगह से
दूसरी जगह घूमने
वाले हैँ जिनका कोई 
निश्चित ठिकाना
नहीँ था
उनका जाति प्रमाण
पत्र नहीँ बनाया जा
सकता


उन्हेँ किसी भी प्रकार का
आरक्षण आज तक
प्राप्त नहीँ है 


निषाद समाज को अलग
से 14.5 प्रतिशत ना देकर
अन्य पिछड़ा वर्ग मेँ
रख दिया गया

और जो 14.5 प्रतिशत
नौकरियाँ
निषादोँ को मिलनी
चाहिए थी
उसमेँ से केवल 0.5
प्रतिशत ही मिल पाता है

बाकी कि 14 नौकरियोँ
पर यादव जाति के
युवकोँ का कब्जा 
हो जाता है


घुमन्तु आरक्षण
मागने तो जाए मार
कर भगा दिया जाएगा
"सालोँ घुमन्तु की जाति
घुमोँ फिरो ऐश करो

नौकरियोँ आदि मेँ हिस्सा
मागोगे तो जमीन मेँ 
दफन कर दिए जाओगे "

अगर आप ब्लाग
लिखते है तो अपने 
ब्लाग पर इसे पोस्ट करेँ

अगर आप नेता हैँ
तो अपने गाँव के
लोगोँ को बताए
via Amit Nishad

समाजवाद क्या है ?

समाजवाद क्या है ?

समाज मेँ सभी जातियोँ और वर्गोँ का सरकारी तंत्र मेँ उनकी आबादी के अनुसार उचित प्रतिनिधित्व

ये परिभाषा समाजवाद के पिता कार्ल माकर्स की है l ऐसी ही परिभाषा हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी के क्रांतिकारी भगत सिँह ने भी दी है

उत्तर प्रदेश मेँ निषाद समाज की सभी उपजातियोँ की आबादी इतनी है कि 404 विधान सभा की सीट मेँ से न्यूनतम 80 निषाद समाज की सभी उपजातियोँ से चुनी जानी चाहिए

खुद को समाजवाद के मुताबिक बताने वाली समाजवादी पार्टी ने क्या निषाद समाज के 80 उम्मीदवारोँ को टिकट दिए हैँ 

अगर नहीँ तो हटा दो ये समाजवादी शब्द पार्टी के नाम से

सपा का नया नाम = जातिवादी पार्टी

बसपा का नया नाम = बपा बहुजन पार्टी

आइए आने वाली 26 जनवरी को संकल्प ले की समाजवाद के नाम पर अन्याय पूर्ण व्यवस्था को नहीँ सहेगेँ
जिस समाजवाद के लिए भगत सिँह आजाद जैसे लोगोँ ने जान दी वो आकर रहेगा



दोस्तोँ जिस दिन गाँव 
गाँव मेँ निषाद समाज
ने एक एक जिन्दा 
बच्चे औरत आदमी 
को जाति को गिन कर
गुपचुप तरीके से
"जाति रजिस्टर" बना लेगी
और फिर सारे आकड़ोँ को जोड़ेगी

उसे पता चलेगा कि
उत्तरप्रदेश मेँ 60 प्रतिशत 
निषाद समाज के लोग हैँ


निषाद समूह के कुछ बुद्विजीवी 
लोगोँ का अनुमान कहता है
उत्तरप्रदेश मेँ 
चाहे जैसे जोड़ो 
न्यूनतम 45 प्रतिशत 
निषाद समाज है

जरा सोचो तब क्या
होगा जब निषाद समाज को
पता चलेगा कि
उत्तरप्रदेश मेँ 60 प्रतिशत 
निषाद समाज के लोग हैँ


अगर विधानसभा की 
60 प्रतिशत सीटेँ
निषाद समाज को दे 
दी जाए

केवल आधी सीटेँ चाहिए सरकार बनाने के लिए


आने वाले 1000 सालो
तक निषाद उत्तरप्रदेश पर राज्य करेँगेँ


आने वाले 1000 सालो
तक उत्तरप्रदेश का हर
मुख्यमंत्री निषाद होगा
हर मंत्री निषाद होगा

हर मंत्रालय के प्रमुख 
की कुर्सी पर निषाद 
बैठा होगा


पर कैसे होगा ये सब
आजादी मिले 65 साल 
हो गए और हमारी जाति
के नेता एक जाति 
रजिस्टर नहीँ बना पाए


अपने गाँव के नेता एक 15 रूपए
की रजिस्टर नोटबुक



क्या आप अपने नेता 
को एक 15 रूपए की 
कापी खरीद कर नहीँ दे सकते ?


निषाद समाज के नेता 
से कहो
लिस्ट बनाए उन सब की जो आगामी मतदान मेँ वोट
देने वाले हैँ

देखना तुम्हारे गाँव मेँ 
हर कोई वोट देने जाएगा

ठाकुर पंडित यादव 
बम्बई दिल्ली गए 
अपने रिश्तेदारोँ को 
भी आने जाने का टिकट और पाँच सौ 
रूपए भेज कर बुला 
लेते हैँ

मतदाता सूची लेकर बैठो
एक एक चेहरे के बारे
मेँ पता लगाओ
वो गाँव मेँ किसके घर 
का है और कहाँ रहता है

अपने दादा जी से पूछो
क्या ये ठाकुर
आपके गाँव मेँ पैदा हुआ था

ध्यान से देखो

सनसनीखेज खुलासे होगेँ

अपने आप को उत्तरप्रदेश मेँ
50 प्रतिशत
बताने के लिए 
इन्होने अपने परिवार
के सदस्योँ की संख्या 
बढा कर लिखाई है

हमारे गाँव मेँ अजय सिँह
के दो बेटे हैँ
मतदाता सूची मेँ इनके
18 बेटे और बेटियोँ के
नाम दर्ज हैँ

दोस्तोँ क्या 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण नहीँ मिलना चाहिए


नहीँ बिल्कुल गलत बात


हर जाति को उसकी आबादी के हिस्सा से
हिस्सा मिलना चाहिए


अगर किसी राज्य मेँ ठाकुर ब्राह्मण की आबादी केवल 2 प्रतिशत है तो उस राज्य मेँ ठाकुर ब्राह्मणोँ को 2 प्रतिशत से ज्यादा सीटेँ नहीँ लेनी चाहिए

आबादी केवल 2 प्रतिशत
फिर भी ठाकुर ब्राह्मण चाहते है कि 50 प्रतिशत सीटेँ सामान्य वर्ग अर्थात ठाकुर लाला ब्राह्मण से भरी जाएँ


क्या ये शहीद भगत सिँह राजगुरू आजाद के समाजवाद के सपने को चकनाचुर करना नहीँ है

क्या ये देश के साथ द्रोह नहीँ कर रही

आरक्षण और इसकी जरुरत!!

एक लम्बे अरसे से हमारे समाज के जागरूक और जुझारू लोग आगे आने वाली पीड़ी के लिए आरक्षण की मांग किये जा रहे हैं लेकिन उनका प्रयाश अबी तक असफल रहा. आरक्षण की लालच में हम लोगों ने बारी - बारी से सपा, बसपा , भाजपा, कांग्रेस सबकी सरकार बनवाते रहे उनका झंडा धोते रहे लेकिन किसी ने हमारी एक न सुनी. उलट हमारे जो पुस्तैनी कारोबार जल-सम्बंधित रोजगार पर दबंग लोगों को कब्ज़ा दिलाते गए. आज स्थिति ये है की हमारे भाई सिर्फ एक मजदूर की हैसियत से काम करते हैं और उसका सारा फायादा दुसरी समुदाय के लोग ले रहे हैं. क्या हमारे समाज में ऐसे धुरंधर लोगों की कमी है या बुद्धि-विवेक में कहीं कमजोर हैं जो इस काम को नहीं चला सकते? अगर समाज में बहुमुखी सर्वेक्षण किया जाये सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, राजनैतिक और रोजगार तो हम लोग अपने को दूसरे वर्गों की तुलना में काफी पीछे हैं अतः अब हमारे समाज का समुचित विकास करने के लिए आरक्षण रूपी बैशाखी की जरुरत है. लेकिन इसके साथ-साथ हमारे युवाओं को इस बात को भी नहीं भुलाना चाहिए की सिर्फ आरक्षण मिल जाने से समाज का विकास नहीं हो पायेगा. आरक्षण से सिर्फ जो कमजोर , बेसहारा हैं उनको फायदा मिलना चाहिए. जिस हिसाब से हमारी संख्या है महज आरक्षण मिल जाने से विकास नहीं होगा हमे अपने युवाओं के जेहन में काबिलियत पैदा करनी पड़ेगी. अतः हमारे युवाओं को आज से ही आरक्षण की आस के बिना अपने लक्ष्य को भेदने के लिए जुट जाना चाहिए. एकलव्य किसी से आरक्षण की मांग नहीं किये थे जो अपने को विश्व - विख्यात साबित किये. बहन फूलन देवी को कोटि- कोटि नमन करता हूँ, जो इतने जुल्म झेलते हुए भी कमीनो को मौत के घाट पहुंचा दिया, उन्होंने किसी आरक्षण और किसी से भीख नहीं मांगी की मेरे साथ अत्याचार हुआ है आप लोग न्याय दिलाएं. उन्होंने अपने बाजुओं में इतनी ताकत दिखाई की लोग थर्रा गए और अपने ही हाथों न्याय कर डाला जो इस देश का कानून और न्याय व्यवस्था नहीं कर पाती. वह आज के ज़माने की महिला हैं हम लोगों में से कुछ लोग मिल भी चुके होंगे, आज वो विश्व- विख्यात हैं. जैसे ही उन्होंने समाज के गरीब, कमजोर , बेसहारा लोगों को मदद करने के लिए एकलव्य सेना का गठन किया तो समाज के गद्दारों को रास नहीं आया की एक अनपढ़ महिला शोषित समाज की मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री बन जाएगी. अंततः वो एक साजिस की शिकार हुईं. अभी हाल ही में दिवंगत नेता स्वर्गीय जमुना प्रसाद निषाद जी भी लगातार साजिशों का शिकार बनते रहे सत्ता पक्ष के मंत्री होते हुए भी सालों जेल में पड़े रहे क्योंकि वो भी बसपा की नीतियों की गुलामी नहीं की और अपने समाज को जागरूक करते रहे. जिन लोगों ने भी इस समाज को जगाने का प्रयाश किया उनको दुसरे वर्गों के लोगों (दबंग/सवर्ण ) का अत्याचार झेलना पड़ा. हमारे नेता भी कभी-कभी अपने बंधुओं का यथावत सहयोग न पाकर कुछ मुद्दों पर दब जाते हैं ऐसे हालत में समाज के युवाओं और बुद्धिजीवियों को आगे आना चाहिए मूक दर्शक मात्र बने रहने से काम नहीं चलेगा. इस आधुनिक युग में हमें अपने राजनेताओं को तकनिकी मदद भी करनी चाहिए, जिससे वो लोगों की साजिस का शिकार न बनें. हमें अपने समाज में एकलव्य और अर्जुन जैसे निपुण वीर न की अभिमन्यु जैसा नौसिखिया लोगों को राजनीति में उतारें और वीरगति प्राप्तt हों. आज हम इस स्थिति में हैं की सभी शेत्रों के माहिर हमारे समाज में विद्यमान हैं हमें अपने विकास के लिए उनसे सलाह-मशविरा करना चाहिए. हमें अपने बच्चों को इस आधुनिक युग में रोजगार परक शिक्षा दिलानी चाहिए. अभी हमारे समाज के ज्यादातर युवा पारंपरिक शिक्षा ले रहे हैं इससे भी वो समाज में पिछड़ते जा रहे हैं. आज यह तकनिकी युग है इस युग में बुलंदी पर पहुँचने के लिए अपनी तकनिकी मजबूत करनी पड़ेगी. आज की हमारी स्थिति ये है की २५ करोड़ की आबादी होते हुए भी एक आई ए यस अधिकारी देने में हमारा समाज विफल है. मुझे अपने समाज के युवाओं विशेष और बहुत ही विनम्र निवेदन है की वे अपने छोटे भाई- बहनों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दें. हमें अपने बच्चों को सान्श्कारिक शिक्षा देने की जरुरत है क्योंकि आज के स्कूलों में नैतिक शिक्षा /संश्कार के बारे में कुछ नहीं बताया जाता. हमें अपने युवाओं को इतना निपुण बनाना है की अपना समाज क्या इस देश की बागडोर संभालें. और अगर मन में ठान लेंगे तो वो दिन दूर नहीं जब एक निषाद का बेटा मुख्यमंत्री और प्रधान मंत्री की कुर्सी पर बैठेगा. संख्या/गणित के आकने यही बताते हैं की अगर ए समाज चेत जाये तो कोई भी पार्टी हमारे सहयोग के बगैर नहीं चल सकती. फिर ये हमारे नेता गण दुसरे लोगों से भीख मांग रहे हैं इन्हें राजनीति की गिनती भी नहीं आती क्या? आरक्षण के लिए भीख मांगने की जरुरत नहीं अपनी ताकत को पहचानने की जरुरत है....Raj Bahadur Nishad

आरक्षण कब मिलेगा


आरक्षण और इसकी जरुरत!! एक लम्बे अरसे से हमारे समाज
के जागरूक और जुझारू लोग आगेआने वाली पीड़ी के लिए
आरक्षण की मांग किये जा रहे हैं लेकिन उनका प्रयाश
अबी तक असफल रहा. आरक्षण की लालच में हम लोगों ने
बारी- बारी से सपा,बसपा , भाजपा, कांग्रेस सबकी सरकार बनवाते रहे
उनका झंडा धोते रहे लेकिन किसी ने हमारी एक न सुनी. उलट हमारे
जो पुस्तैनी कारोबार जल- सम्बंधित रोजगार पर दबंग लोगों को कब्ज़ा दिलाते गए.
आज स्थिति ये है की हमारे भाई सिर्फ एक मजदूर की हैसियत से काम करते हैं और
उसका सारा फायादा दुसरी के लोग ले रहे हैं. क्या हमारे समाज में ऐसे धुरंधर
लोगों की कमी है या बुद्धि- विवेक में कहीं कमजोर हैं जो इस काम
को नहीं चला सकते? अगर समाज में बहुमुखी सर्वेक्षण किया जाये सामाजिक,
आर्थिक, शैक्षणिक, राजनैतिक और रोजगार तो हम लोग अपने को दूसरे
वर्गों की तुलना में काफी पीछे हैं अतः अब हमारे समाज का समुचित विकास
करने के लिए आरक्षण रूपी बैशाखी की जरुरत है. लेकिन इसके साथ-साथ हमारे
युवाओं को इस बात को भी नहीं भुलाना चाहिए की सिर्फ आरक्षण मिल जाने
से समाज का विकास नहीं हो पायेगा. आरक्षण से सिर्फ जो कमजोर , बेसहारा हैं
उनको फायदा मिलना चाहिए जिस हिसाब से हमारी संख्या है महज आरक्षण
मिल जाने से विकास नहीं होगा हमे अपने युवाओं के जेहन में काबिलियत
पैदा करनी पड़ेगी. अतः हमारे युवाओं को आज से ही आरक्षण की आस के
बिना अपने लक्ष्य को भेदने के लिए जुट जाना चाहिए.एकलव्य किसी से आरक्षण
की मांग नहीं किये थे जो अपने को विश्व- विख्यात साबित किये. बहन फूलन
देवी को कोटि- कोटि नमन करता हूँ, जो इतने जुल्म झेलते हुए भी कमीनो को मौत के
घाट पहुंचा दिया, उन्होंने किसी आरक्षण और किसी से भीख नहीं मांगी की मेरे साथ
अत्याचार हुआ है आप लोग न्याय दिलाएं. उन्होंने अपने बाजुओं में इतनी ताकत दिखाई
की लोग थर्रा गए और अपने ही हाथों न्याय कर डाला जो इस देश का कानून
और न्याय व्यवस्था नहीं कर पाती. वह आज के ज़माने की महिला हैं हम लोगों में से
कुछ लोग मिल भी चुके होंगे, आज वो विश्व- विख्यात हैं. जैसे ही उन्होंने समाज के
गरीब, कमजोर , बेसहारा लोगों को मदद करने के लिए एकलव्य सेना का गठन
किया तो समाज के गद्दारों को रास नहीं आया की एक अनपढ़ महिला शोषित समाज
की मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री बन जाएगी. अंततः वो एक साजिस की शिकार हुईं. अभी हाल
ही में दिवंगत नेता स्वर्गीय जमुना प्रसाद निषाद जी भी लगातार साजिशों का शिकार बनते रहे
सत्ता पक्ष के मंत्री होते हुए भी सालों जेल में पड़े रहे क्योंकि वो भी बसपा की नीत
अपने समाज को जागरूक करते रहे. जिन लोगों ने भी इस समाज को जगाने का प्रयाश
किया उनको दुसरे वर्गों के लोगों(दबंग/सवर्ण ) का अत्याचार झेलना पड़ा. हमारे नेता भी कभी-
कभी अपने बंधुओं का यथावत सहयोग न पाकर कुछ मुद्दों पर दब जाते हैं ऐसे
हालत में समाज के युवाओं और बुद्धिजीवियों को आगे आना चाहिए मूक दर्शक मात्र
बने रहने से काम नहीं चलेगा. इस आधुनिक युग में हमें अपने राजनेताओं को तकनिकी मदद
भी करनी चाहिए, जिससे वो लोगों की साजिस का शिकार न बनें. हमें अपने
समाज में एकलव्य और अर्जुन जैसे निपुण वीर न की अभिमन्यु जैसा नौसिखिया लोगों को र
उतारें और वीरगति प्राप्तt हों. आज हम इस स्थिति में हैं की सभी शेत्रों के माहिर
हमारे समाज में विद्यमान हैं हमें अपने विकास के लिए उनसे सलाह-मशविर
ा करना चाहिए. हमें अपने बच्चों को इस आधुनिक युग में रोजगार परक
शिक्षा दिलानी चाहिए. अभी हमारे समाज के ज्यादातर युवा पारंपरिक शिक्षा ले रहे हैं इससे
भी वो समाज में पिछड़ते जा रहे हैं. आज यह तकनिकी युग है इस युग में
बुलंदी पर पहुँचने के लिए अपनी तकनिकी मजबूत करनी पड़ेगी. आज की हमारी स्थिति ये है
की २५ करोड़ की आबादी होते हुए भी एक आई ए यस अधिकारी देने में हमारा समाज विफल है. मुझे
अपने समाज के युवाओं विशेष और बहुत ही विनम्र निवेदन है की वे अपने छोटे भाई-
बहनों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दें. हमें अपने बच्चों को सान्श्कारिक शिक्षा देने की जरुरत है
क्योंकि आज के स्कूलों में नैतिक शिक्षा/संश्कार के बारे में कुछ नहीं बताया जाता. हमें अपने
युवाओं को इतना निपुण बनाना है की अपना समाज क्या इस देश की बागडोर संभालें. और अगर मन में ठान
लेंगे तो वो दिन दूर नहीं जब एक निषाद का बेटा मुख्यमंत्र ी और प्रधान मंत्री की कुर्सी पर बैठेगा.
संख्या/गणित के आकने यही बताते हैं की अगर ए समाज चेत जाये तो कोई भी पार्टी हमारे सहयोग के
बगैर नहीं चल सकती. फिर ये हमारे नेता गण दुसरे लोगों से भीख मांग रहे हैं इन्हें राजनीति की गिनती भी नह
आरक्षण के लिए भीख मांगने की जरुरत नहीं अपनी ताकत को पहचानने की जरुरत है.
जय हिंद-जय निषाद 
via-facebook rajbahadur nishad

आरक्षण के नाव को पाकर हरिजन तो सागर पार होगये लेकिन नाव खेनेवाले माझी खुद भवसागर मे डुब रहे है।

टूटी खटिया,फूटी हाँडी एक अदद
फटी कथरी जिस पर हर हफ्ते ही पैबंद
लगाया जाता है । पेट फुलाए, दुबले -
पतले गंदे -अधनंगे बच्चे जिनको इस
एक कथरी पर इक साथ सुलाया जाता है ।
दिन भर में बस एक जून ही घर में
खाना पकता है दिन भर में बस एक बार
ये चूल्हा जलाया जाता है। देश चलाने
वालों एक दिन मल्लाह-केवट बस्ती में आकर
देखो घोर अभावों में भी जीवन कैसे
बिताया जाता है। लालकिले से केवट -
बस्ती की दूरी को जल्दी पाटो बापू
का इक मन्त्र आज फिर -फिर यह
दोहराता है । मल्लाहो की स्थिती कितनी बद से बत्तर है की वे अपनी आजीवका भी चलाना मुस्किल है। आरक्षण के नाव को पाकर हरिजन सागर पार हो गये लेकिन नाव खेनेवाले माझी खुद भवसागर मे डुब रहे है जिसे बचाना होगा। राज चलाने वाले नेता इनका भी ध्यान दे अन्यथा मल्लाहो की नैया डुब न जाय। कैसे राजा है जिनके राज मे प्रजा अभाव का जीवन जी रहा है। राज चलाओ और अपनी नजर इधर भी लगावो।

हर कीमत पर चाहिए आरक्षण

अपाहिज व्यथा को सहन कर रहा हूँ,
तुम्हारी कहन थी, कहन कर रहा हूँ ।

ये दरवाज़ा खोलो तो खुलता नहीं है,
इसे तोड़ने का जतन कर रहा हूँ ।

अँधेरे में कुछ ज़िंदगी होम कर दी,
उजाले में अब ये हवन कर रहा हूँ ।

Hame apane huk ke liye ladana hai

Mere priya nishad bandhu hame apane purwajo ko nahi bhoolna chahiye. Ekalavay sa guru bhakti bhism si sakti.
Guharaj jaisi mitravat,
Phoolan jaise nirbhayta honi chahiye hum me. Hamari jati me abhi bhi 90% atyadhik garib hai. Unke uthan ke liye kam se kam hame na sahi ane wali pidi ke liye Aaransan ki mang karni chahiye. Hame ekjut hokar Aandolan karna hoga. Hamari jati me harajano se bhi battar jindgi jee rahe hai log. Din bhar machhali mar rahe thatha raat me daru peekar so rahe log. Unhe jagana hoga. Sabke dilo me aag lagana hoga. Apani jati ke utthan ke liye hum kuch bhi kar sakte ha. Humari takat ko abhi koi dekha nahi lucknow kya hai Dilli ko bhi hila sakate ha hum. Utho chadar pheko andhere ko khatm karna hai, apane huk ke liye hume ladana ha.
Phoolan jaisi sahasi veerangnaye hamare kul me hai tab hume kisase darna hai. Hume apane huk ke liye ladana hai.